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वजह जानें: मोहम्मद अली जिन्ना ने ‘भारत’ नाम के खिलाफ विरोध क्यों किया?

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Jinnah started opposing naming of India as 'INDIA'.


‘भारत का नाम ‘INDIA’ रखने का विरोध करने लगे थे मोहम्मद अली जिन्ना? जानें – वजह…. ’

भारत का नाम ‘INDIA’ पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यह नाम भारत की पहचान बन चुका है और विश्वभर में इसे बहुत ही प्रचलित रूप में बोला और लिखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम के समय यह नाम विवाद का विषय बन चुका था? स्वतंत्रता पूर्व और पश्चिम भारत के मसले के कारण मुस्लिम नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत के नाम ‘INDIA’ रखने का विरोध किया था। इसकी वजह जानने के लिए हमें स्वतंत्रता आंदोलन की ओर बढ़ना होगा।

स्वतंत्रता संग्राम के समय, भारतीय मुस्लिम समुदाय में तनाव था। हिन्दू-मुस्लिम तकरार और असहमति का बावजूद, महात्मा गांधी ने अपना हार्दिक प्रयास किया था कि एक ऐसा नाम चुना जाए, जो दोनों समुदायों को संगठित कर सके और विभाजन के खतरे को कम कर सके।

लेकिन फिर भी, जिन्ना को INDIA के नाम से असंतोष था। उन्होंने यह दावा किया कि यह नाम हिन्दू धर्म पर आधारित है और इसे मुसलमानों को फिट नहीं होता है। इसके साथ ही, वे इस मामले में अपने समर्थकों के साथ सहमत थे। उन्होंने अपने अपार हस्तक्षेप के साथ शोध किया और भारत का नया नाम ईमान के संग्राम पर पड़ा।

जिन्ना की मांगों की मदद से मंगलवार दिन 29 जुलाई 1947 को न्यू दिल्ली में उन्हीं के तत्वाधान में हुए एक बड़े इतिहासिक अधिवेशन में यह चर्चा होने लगी। इस अधिवेशन में तीसरे सत्र के दौरान, कांग्रेस के सदस्यों ने मोहम्मद अली जिन्ना को मुख्यमंत्री (प्रधानमंत्री) के तौर पर चुनने का प्रस्ताव पेश किया। इस प्रतिनिधिमंडल में 56 सदस्य पारित हो गए, जिसमें सर्वसम्मति के साथ यह निर्णय लिया गया था कि ‘भारत’ नाम संगठन के लिए चुना जाए।

यह नया नाम मोहम्मद अली जिन्ना पर गहरा असर डाला। उन्होंने नया संविधान बनाने और नया मुक़ाबला करने का वादा किया। इसके पश्चात भारत में द्वि-संगठनवाद घट गया और राजनीतिक स्थिति दिनोत्तेजित देश की स्थापना के रास्ते में बढ़ती गई। जिन्ना ने भारत के संविधान में संकल्प डालने का वादा किया था, जिससे उनमें प्राथमिकता प्राप्त हुई।

यद्यपि भारत के नए नाम ‘भारत’ की स्थापना के बाद भी मुस्लिम समुदाय के संगठन में समायोजन की समस्या थी, लेकिन जिन्ना और उनके समर्थकों के लिए भारत के नाम पर उनकी पराजय की निशानी थी। वे जनता की प्राथमिकताओं को पूरा करने की कोशिश कर रहे थे और समुदायिक सामरिकता को स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे।

समाप्त करते हुए, हम कह सकते हैं कि भारत के नए नाम ‘भारत’ को रखने से देश में एक सामंजस्य की स्थापना हुई और जिन्ना ने भारत की आज़ादी के बाद अपना वचन पूरा किया। भारत में एक मज़बूत, सुरक्षित और संवृद्धि की दिशा में उठाने की एक नई शुरुआत हुई, जिसमें सभी समुदायों ने शामिल होने का वादा किया।